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बड़ी खबर : अमेरिका-ईरान युद्ध पर ब्रेक, 4 महीने बाद शांति समझौते का ऐलान

Jagbhan Yadav

Mon, Jun 15, 2026

BIG NEWS : करीब चार महीने से जारी संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हो गया है. इस समझौते की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की. इस खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ था.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किया ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है.

उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोला जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तुरंत हटाई जाएगी. साथ ही दुनिया भर के जहाजों को फिर से सामान्य आवाजाही शुरू करने का संदेश दिया गया.

पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
समझौते तक पहुंचने में पाकिस्तान की अहम भूमिका बताई गई है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, ‘दोनों पक्षों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने पर सहमति जताई है. इसमें लेबनान भी शामिल है. उन्होंने यह भी बताया कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा.’

आखिरी वक्त पर फंस सकता था समझौता
रिपोर्ट के अनुसार रविवार को यह समझौता लगभग टूटने की स्थिति में पहुंच गया था. कारण यह था कि इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी इलाके में हमला किया, जहां ईरान समर्थित हिजबुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाया गया था. इसके बावजूद बातचीत जारी रही और अंततः समझौते की घोषणा कर दी गई.

समझौते में क्या-क्या शामिल है?
दोनों देशों के बीच हुई सहमति में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं.

सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकना.
लेबनान को भी समझौते के दायरे में शामिल करना.
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना.
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना.
इस सप्ताह तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रखना.
19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर करना.

परमाणु कार्यक्रम पर भी बनी सहमति
समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी शामिल है. जानकारी के अनुसार, समझौते में परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और अत्यधिक समृद्ध परमाणु सामग्री को नष्ट करने की बात कही गई है. इसके लिए निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था भी लागू करने का प्रस्ताव है.

हालांकि यहां एक बड़ा मतभेद भी सामने आया है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि परमाणु सामग्री को नष्ट किया जाएगा, जबकि एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को अपने देश में ही अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को कम करने की अनुमति देने पर सहमति जताई है.

अभी अंतिम शांति समझौता नहीं
यह समझौता फिलहाल अंतिम शांति संधि नहीं है. इसे एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग बताया गया है, जिसके तहत अगले 60 दिनों तक दोनों पक्ष एक व्यापक और अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत करेंगे. इस दौरान अमेरिकी और ईरानी अधिकारी आगे की शर्तों पर चर्चा करेंगे.

ईरान ने रखी अपनी शर्त
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अंतिम समझौते पर बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब ईरान यह सुनिश्चित कर लेगा कि अमेरिका अपने वादों को पूरा कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसमें सैन्य कार्रवाई रोकना, नाकाबंदी हटाना और संपत्तियों को जारी करना जैसी बातें शामिल हैं. साथ ही उन्होंने साफ कहा कि यह समझौता अमेरिका पर भरोसा करने का संकेत नहीं है और ईरान अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के पालन पर नजर रखेगा.

अब आगे क्या?
अब सबकी नजर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह पर है. अगर आने वाले 60 दिनों की बातचीत सफल रहती है, तो यह समझौता अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है.

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