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कोयला आयात घटाने की बड़ी तैयारी : सरकार ने बदली पूरी रणनीति

Jagbhan Yadav

Tue, Jul 21, 2026

देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने खनन क्षेत्र में कई नीतिगत सुधार और प्रशासनिक पहल लागू की हैं। सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन बढ़ाकर गैर-जरूरी कोयला आयात को समाप्त करना है।

सरकार ने कोयला ब्लॉकों के विकास की नियमित समीक्षा, खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2021 के प्रावधानों का क्रियान्वयन तथा ‘सिंगल विंडो क्लियरेंस पोर्टल’ जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से खनन परियोजनाओं को गति दी है। साथ ही, कोयला ब्लॉक आवंटियों को विभिन्न स्वीकृतियां प्राप्त कराने के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) भी स्थापित की गई है।

जून 2020 से शुरू हुई वाणिज्यिक कोयला खनन नीति के तहत अब तक 132 कोयला ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें 23 ब्लॉकों को खदान खोलने की अनुमति मिल चुकी है, जबकि 15 ब्लॉकों में उत्पादन शुरू हो चुका है। शेष ब्लॉकों में निर्धारित समयसीमा के अनुसार विकास कार्य जारी है।

सरकार ने पूर्ण रूप से खोजे गए कोयला ब्लॉकों के विकास की समयसीमा 51 महीने से घटाकर 40 महीने तथा आंशिक रूप से खोजे गए ब्लॉकों की समयसीमा 66 महीने से घटाकर 52 महीने कर दी है। इसके अलावा, कोयला गैसीकरण और द्रवीकरण को बढ़ावा देने के लिए वाणिज्यिक खनन में प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए 100 प्रतिशत स्वचालित मार्ग, पारदर्शी राजस्व साझाकरण मॉडल और उदार बोली शर्तों जैसी व्यवस्थाओं के जरिए निजी निवेश को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) आधुनिक मास प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी, सतत खनन मशीनों, लॉन्गवॉल और हाईवॉल तकनीक का उपयोग कर उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है। वहीं, सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) नई परियोजनाओं के साथ कोयला निकासी के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है।

सरकार का कहना है कि इन उपायों से घरेलू कोयला उत्पादन में वृद्धि होगी और आयात पर निर्भरता लगातार कम होगी।

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