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झंडों को जमीन पर नहीं फेंकना चाहिए : गृह मंत्रालय

Jagbhan Yadav

Tue, Aug 11, 2026

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ध्वज संहिता का पालन करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने कहा कि हालांकि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों के दौरान आम लोग कागज से बने झंडे लहरा सकते हैं, लेकिन कार्यक्रमों के बाद उन्हें फेंका या जमीन पर नहीं डाला जाना चाहिए।

सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजा गया संदेश

कल सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे गए एक संदेश में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े कानूनों, तौर-तरीकों और नियमों के बारे में लोगों के साथ-साथ सरकारी संगठनों और एजेंसियों में भी अक्सर जानकारी की कमी देखी जाती है।

भारत का राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक

इसमें कहा गया, “मुझे यह कहने का निर्देश दिया गया है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है, इसलिए इसे सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए।” मंत्रालय ने राज्यों से कहा कि वे इस संबंध में बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम चलाएं और इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों के जरिए इनका व्यापक प्रचार-प्रसार करें।

अमित शाह ने की अपील

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकों से तिरंगा यात्राओं, तिरंगा रैलियों और ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन के माध्यम से इस अभियान में भाग लेने और इसे मनाने तथा हर घर तिरंगा की आधिकारिक वेबसाइट पर तिरंगा फहराते हुए अपनी सेल्फी साझा करने की अपील की। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संदेश में उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू किया गया ‘हर घर तिरंगा’ अभियान हमारे राष्ट्र की सामूहिक ताकत का प्रतिबिंब है, जो हमें एक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के हमारे प्रयास में एकजुट करता है।” उन्होंने कहा, “इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का अवसर इस अभियान के साथ मिलकर हर देशभक्त के लिए इस पल को और भी भावुक और खास बना देता है।”

ध्वज संहिता में कहा गया है

गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और बुना हुआ या मशीन से बना होना चाहिए, और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री सूती, पॉलिएस्टर, ऊन, रेशम या खादी की होनी चाहिए। आदेश के साथ संलग्न ध्वज संहिता में कहा गया, “कोई भी आम नागरिक, निजी संस्था या शिक्षण संस्थान राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए, किसी भी दिन या अवसर पर-चाहे वह औपचारिक हो या कोई अन्य-राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है या प्रदर्शित कर सकता है। 19 जुलाई, 2022 के आदेश के जरिए ‘भारतीय झंडा संहिता, 2002’ में संशोधन किया गया था… यदि तिरंगा खुले स्थान पर या किसी आम नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है तो उसे दिन-रात फहराया जा सकता है।”

जब कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानजनक होनी चाहिए

इसमें स्पष्ट किया गया कि जब कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानजनक होनी चाहिए, और फटा हुआ एवं मैला-कुचैला झंडा प्रदर्शित न किया जाए। संदेश में कहा गया कि झंडे को किसी अन्य झंडे अथवा झंडों के साथ एक ही ध्वजदंड से नहीं फहराया जाए।

इसमें कहा गया, “संहिता के भाग-3 की धारा-9 में उल्लखित गणमान्य व्यक्तियों जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि, के सिवाय झंडे को किसी वाहन पर नहीं लगाया जाएगा। किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचाई पर या उससे ऊपर या उसके बराबर में नहीं लगाना चाहिए।

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