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पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचें, जानें आज का शुभ-अशुभ मुहूर्त

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Aaj ka Panchang 1 November 2026 : पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचें, जानें आज का शुभ-अशुभ मुहूर्त

Jagbhan Yadav

Sun, Nov 1, 2026

Aaj ka Panchang 1 November 2026: हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. पढ़ें आज का पंचांग-

आज यानी 1 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी. इसके बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 2 नवंबर दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगी. रविवार को सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर सूर्योदय और शाम 5 बजकर 44 मिनट पर सूर्यास्त होगा. 

आज के योग 

पंचांग के अनुसार, आज सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं. स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और स्वामी राहु हैं. इस नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से लोगों में पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से निकलकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की भावना प्रबल होती है.

आज का शुभ मुहूर्त

रविवार दोपहर 2 बजकर 39 मिनट तक साध्य योग रहेगा, इसके बाद शुभ योग आरंभ होगा. ज्योतिष के अनुसार, साध्य योग 27 नित्य योगों में से 22वां योग माना जाता है. 'साध्य' शब्द का अर्थ है कि जिसे साधा जा सके या जो प्राप्त करने योग्य हो. इस योग की देवी माता सावित्री (माता सरस्वती) मानी जाती हैं और इसके प्रमुख ग्रह बुध हैं. यह योग अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दौरान कठिन से कठिन कार्य भी आसानी से पूरे हो जाते हैं.

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.

रविवार को रात 10 बजकर 23 से 11 बजकर 55 मिनट तक अमृतकाल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल भी एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है.

आज का अशुभ समय

आज राहुकाल शाम 4 बजकर 21 मिनट से 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.

रविवार को यमगंड काल दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 1 बजकर 34 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेन-देन से बचना चाहिए.

इस दिन गुलिक काल दोपहर 2 बजकर 57 मिनट से 4 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं. बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.

रविवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य जब तुला राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे सूर्य का नीच होना या नीचस्थ होना कहा जाता है. सूर्य अग्नि तत्व का कारक है, जबकि तुला राशि वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन आती है, जो सूर्य के स्वभाव के विपरीत है. सूर्य को अहंकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है. तुला राशि में आने से आत्मबल या ऊर्जा थोड़ी कमजोर महसूस हो सकती है. इस स्थिति में किसी भी फैसले पर पहुंचना मुश्किल हो सकता है.

इस दिन चंद्र देव कर्क राशि में रहेंगे. कर्क राशि चंद्रमा की स्वयं की राशि है (चंद्रमा इस राशि के स्वामी हैं). जब चंद्रमा अपनी ही राशि (कर्क) में स्थित होते हैं, तो इसके अत्यंत प्रभावशाली और गहरे परिणाम देखने को मिलते हैं. कर्क राशि जल तत्व की राशि है, इसलिए चंद्रमा यहाँ होने पर व्यक्ति की कल्पना शक्ति, कला और रचनात्मकता में वृद्धि होती है.

रविवार को दिशाशूल पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में रहेगा. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है.

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