कौन हैं कुणाल शाह, जिन्हें मिला व्हाट्सएप का बड़ा जिम्मा? : कहां से पढ़े-लिखे हैं और कितनी मिलेगी सैलरी? जानकर रह जाएंगे ह
Jagbhan Yadav
Tue, Jun 23, 2026
Whatsapp New CEO: मेटा प्लेटफॉर्म्स ने भारत की फिनटेक कंपनी CRED में करीब 8,500 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश करने का फैसला किया है। यह जानकारी दोनों कंपनियों ने 22 जून को साझा की है। इस निवेश को भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और फिनटेक सेक्टर में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसमें न सिर्फ कंपनियों की साझेदारी मजबूत होगी, बल्कि देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में भी बदलाव आने की उम्मीद है।
कुणाल शाह को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
इस बड़े समझौते के बाद CRED के संस्थापक कुणाल शाह को एक बड़ी वैश्विक जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे WhatsApp के ग्लोबल सीईओ बन सकते हैं और मौजूदा प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह ले सकते हैं। हालांकि इस नियुक्ति को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन टेक जगत में यह खबर तेजी से फैल रही है और इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षा और शुरुआती करियर की कहानी
कुणाल शाह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के विल्सन कॉलेज से की। जहां उन्होंने फिलॉसफी यानी दर्शनशास्त्र में बीए किया। इसके बाद उन्होंने एमबीए की पढ़ाई शुरू की लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाए। बाद में उन्होंने NMIMS कॉलेज में पार्ट-टाइम MBA में दाखिला लिया। लेकिन वह कोर्स भी बीच में ही छोड़ दिया। अपने करियर की शुरुआत से ही उन्होंने पढ़ाई के साथ काम करने की आदत डाल ली थी। जिसने आगे चलकर उन्हें एक सफल उद्यमी बनाया।
सैलरी और कमाई का अनुमान
अगर कुणाल शाह WhatsApp के ग्लोबल सीईओ बनते हैं तो उनकी सैलरी को लेकर अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। लेकिन अनुमान के अनुसार, मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों में सीईओ को सालाना लगभग 2 करोड़ से 4 करोड़ रुपये तक का पैकेज मिल सकता है। इसके अलावा उन्हें कंपनी के शेयर, बोनस और परफॉर्मेंस आधारित इंसेंटिव भी दिए जाते हैं जो कुल आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
नेटवर्थ और भारत के लिए इस डील का महत्व
कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 15,000 करोड़ रुपये बताई जाती है। जिसका बड़ा हिस्सा उनकी फिनटेक कंपनी CRED में हिस्सेदारी से आता है। हाल ही में मेटा के निवेश के बाद कंपनी का वैल्यूएशन भी बढ़ा है। यह डील भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया और कॉमर्स को जोड़कर एक बड़ा इकोसिस्टम बन सकता है। साथ ही यह भी संकेत है कि वैश्विक टेक कंपनियां भारत के डिजिटल बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती हैं।
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