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उत्तरप्रदेश क्राइम : बांदा। जिस ई-रिक्शा का पहिया यात्रियों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने के लिए घूमना चाहिए, उसी को दरिंदगी का माध्यम बना दि

Jagbhan Yadav

Sun, Jul 26, 2026

बांदा। जिस ई-रिक्शा का पहिया यात्रियों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने के लिए घूमना चाहिए, उसी को दरिंदगी का माध्यम बना दिया गया। थाना मरका क्षेत्र की एक नाबालिग बालिका के अपहरण और दुष्कर्म के प्रयास के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। जवाबी फायरिंग में आरोपी एजाज के पैर में गोली लगी, जबकि मुठभेड़ के दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। सभी घायलों की हालत सामान्य बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, 24 जुलाई की शाम घर से नाराज होकर ननिहाल जाने निकली नाबालिग देर रात बांदा पहुंची और नरैनी जाने के लिए ई-रिक्शा में बैठी। आरोप है कि ई-रिक्शा चालक नरेश कुमार ने अपने साथी एजाज के साथ मिलकर उसका अपहरण किया और दुष्कर्म का प्रयास किया। घटना के बाद दोनों फरार हो गए थे।

पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन में कोतवाली नगर, थाना मरका, एसओजी और सर्विलांस की संयुक्त टीम गठित की गई। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और ई-रिक्शा के सत्यापन के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। शनिवार को सूचना मिलने पर गंछा रोड पर घेराबंदी की गई। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण के लिए कहने पर आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में एजाज घायल हो गया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

मुठभेड़ के दौरान कांस्टेबल मोहम्मद युनुस और कांस्टेबल इन्द्रपाल सिंह भी घायल हुए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 315 बोर का एक अवैध तमंचा, दो जिंदा कारतूस, तीन खोखा कारतूस और घटना में प्रयुक्त ई-रिक्शा बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी एजाज का आपराधिक इतिहास भी है

और वह पहले भी जेल जा चुका है।इस कार्रवाई का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक बलराम सिंह, थानाध्यक्ष सुबेदार बिन्द, एसओजी प्रभारी आनंद कुमार, सर्विलांस प्रभारी राजेश मौर्य सहित संयुक्त पुलिस टीम ने किया। यह कार्रवाई पुलिस की सक्रियता का प्रमाण है, लेकिन यह घटना एक गंभीर सवाल भी छोड़ जाती है।

यदि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालकों का नियमित सत्यापन, प्रभावी निगरानी और कड़ी जवाबदेही सुनिश्चित होती, तो शायद किसी मासूम को इस भयावह अनुभव से नहीं गुजरना पड़ता। अपराधियों का गिरफ्तार होना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है ऐसा तंत्र खड़ा करना, जहां बेटियां बिना डर के सफर कर सकें और अपराध करने का साहस ही किसी में न बचे।

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