केलो परियोजना : की वितरक नहर के कार्यों के लिए 3.56 करोड़ रुपये स्वीकृत
Thu, Apr 23, 2026
रायपुर-
-छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा, रायगढ़ जिले के अंतर्गत केलो परियोजना की शरदा वितरक नहर के आर.डी. 0 मी. से 5000 मी. तक सीमेंट कांक्रीट लाईनिंग कार्य के लिए 3 करोड़ 56 लाख 72 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण हो जाने पर योजना की रूपांकित सिंचाई क्षेत्र 1113.92 हेक्टेयर में 740.92 हेक्टेयर की हो रही कमी पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्य अभियंता मिनीमाता (हसदेव) बांगो परियोजना जल संसाधन विभाग बिलासपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
BREAKING : छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र 30 अप्रैल को, अधिसूचना जारी
Thu, Apr 23, 2026
रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र 30 अप्रैल को आहूत किया गया है। राज्य सरकार के आग्रह पर राज्यपाल ने अपनी मंजूरी दे दी है।
इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष की भूमिका को लेकर सत्ता रूढ़ भाजपा निंदा प्रस्ताव पारित करेगी। वहीं कांग्रेस ने कहा है कि वह सदन में पुरजोर तरीके से प्रस्ताव के विरोध में अपने तथ्य रखेगी।
स्व-सहायता समूह से जुड़कर : बदली जिंदगी की तस्वीर
Thu, Apr 23, 2026
00-स्वरोजगार अपनाकर लखपति दीदी बनीं सम्पत्ति प्रजापति
00-मासिक आय 10 हजार रुपये से बढ़कर हुई 25 हजार रुपये तक
रायपुर
-मुंगेली जिले के जनपद पंचायत लोरमी के ग्राम खपरीकला की निवासी सम्पत्ति प्रजापति ने सीमित संसाधनों के बावजूद स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली सम्पत्ति दीदी आज लखपति दीदी के रूप में पहचानी जा रही हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। समूह से जुडऩे से पहले उनके परिवार की आय का मुख्य साधन एक छोटा सा होटल व्यवसाय था, जिससे मुश्किल से घर का खर्च चल पाता था। परिवार की आवश्यकताएं पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन एनआरएलएम (बिहान) योजना के अंतर्गत जय शनिदेव महिला स्व-सहायता समूह से जुडऩे के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। समूह के माध्यम से उन्हें रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड एवं बैंक लिंकेज के तहत ऋण सुविधाएं प्राप्त हुईं। इन संसाधनों का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपने होटल व्यवसाय का विस्तार किया और साथ ही सुहाग भंडार एवं किओस्क बैंकिंग का कार्य भी शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि उनकी मासिक आय, जो पहले मात्र 10 हजार रुपये थी, बढ़कर अब लगभग 25 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जबकि वार्षिक आय करीब 03 लाख रुपये हो गई है। इसके साथ ही कृषि कार्य से भी उन्हें सालाना लगभग 01 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। आर्थिक सशक्तिकरण के इस सफर ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। परिवार का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है और वे आज आत्मनिर्भर बनकर सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। सम्पत्ति दीदी अब अपने व्यवसाय को और विस्तार देने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी यह सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, योजनाओं का लाभ और दृढ़ संकल्प से कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है।