Thursday 6th of August 2026

ब्रेकिंग

पूरे समाज की जिम्मेदारी: RSS प्रमुख मोहन भागवत

बैगपाइपर, रॉयल चैलेंज की बिक्री पर आखिर क्यों लगाई रोक ?

अध्यक्ष से मिले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल , जाना स्वास्थ्य हाल

चीज़ और बटर पर पूरी तरह प्रतिबंध, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

स्वास्थ्य मंत्री बोले- मिलावटखोरों को नहीं छोड़ेंगे

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

छत्तीसगढ़ में पहली बार मिला दुर्लभ श्वेत कॉमन करैत : छठा राज्य बना वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण खोज

Jagbhan Yadav

Mon, Jul 27, 2026

दुर्ग/चरोदा। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चरोदा स्थित पंचशील नगर में एक अत्यंत दुर्लभ ल्यूसिस्टिक (Leucistic) कॉमन करैत (Bungarus caeruleus) मिलने से वन्यजीव एवं वैज्ञानिक जगत में उत्साह का माहौल है। यह दुर्लभ सांप 21 जुलाई 2026 की रात लगभग 9:10 बजे एक आवासीय मकान से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू एवं सुरक्षित रिलीज का कार्य वन विभाग , अविनाश मौर्य एवं विजय शर्मा द्वारा किया गया।

जांच के दौरान यह लगभग 2.5 से 3 फीट कॉमन करैत पाया गई। इसका पूरा शरीर लगभग सफेद था, जबकि आंखें सामान्य काले रंग की थीं। इसी कारण इसे अल्बिनो (Albino) नहीं बल्कि ल्यूसिस्टिक (Leucistic) माना गया। ल्यूसिज्म एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था है, जिसमें शरीर के अधिकांश भाग का रंगद्रव्य (Pigmentation) कम हो जाता है, लेकिन आंखों का रंग सामान्य बना रहता है।

प्रारंभिक उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य के अनुसार, भारत में इस प्रकार के ल्यूसिस्टिक कॉमन करैत के बहुत कम प्रामाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर छत्तीसगढ़ इस दुर्लभ घटना का दस्तावेजीकरण करने वाला देश का छठा राज्य बन सकता है। हालांकि अंतिम पुष्टि वैज्ञानिक शोध-पत्र के प्रकाशन एवं विस्तृत साहित्य समीक्षा के बाद होगी।

कॉमन करैत भारत के सबसे विषैले सर्पों में से एक है तथा इसे देश के “बिग फोर” विषैले सांपों में शामिल किया जाता है। इसका विष मुख्यतः न्यूरोटॉक्सिक (Neurotoxic) होता है, जो सीधे तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव डालता है। इसकी सबसे खतरनाक विशेषता यह है कि इसका दंश अक्सर बिना अधिक दर्द के होता है, जिससे कई बार पीड़ित व्यक्ति समय पर इसकी गंभीरता को समझ नहीं पाता। समय पर उपचार न मिलने पर श्वसन तंत्र प्रभावित होने से मृत्यु भी हो सकती है। भारत में अधिकांश गंभीर सर्पदंश इन्हीं चार प्रमुख विषैले सर्पों से जुड़े होते हैं, जिनमें कॉमन करैत भी शामिल है।

छत्तीसगढ़ में विशेषकर वर्षा ऋतु के दौरान कॉमन करैत के दंश के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। हाल के दिनों में भी राज्य में करैत के काटने से कई मौतों की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे इस प्रजाति के प्रति जागरूकता और समय पर उपचार की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
वन्यजीव रेस्क्यूअर विशेषज्ञ अविनाश मौर्य ने बताया कि सफेद रंग होने के बावजूद यह सांप सामान्य कॉमन करैत जितना ही विषैला था। उन्होंने कहा कि लोग किसी भी सफेद या अलग रंग के सांप को देखकर उसे पकड़ने या मारने का प्रयास न करें। ऐसे मामलों में तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम अथवा वन विभाग को सूचना दें।

रेस्क्यू के बाद वन विभाग ओर विशेषज्ञों के दिशा-निर्देशों के अनुसार सांप को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि भारतीय सर्प विज्ञान (Herpetology) के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस दुर्लभ रिकॉर्ड पर आधारित विस्तृत वैज्ञानिक शोध-पत्र तैयार किया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित करने की तैयारी चल रही है। यदि यह रिकॉर्ड प्रकाशित होता है, तो यह छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जाएगी।

अंत में वन्यजीव रेस्क्यूअर अविनाश मौर्य ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल किसी पर्व या वर्षा ऋतु तक सीमित नहीं होना चाहिए। सांप सहित सभी वन्यजीव हमारी जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और वर्षभर इनके संरक्षण के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। यदि कहीं कोई सांप अथवा अन्य वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे नुकसान पहुँचाने या मारने का प्रयास न करें। प्रशिक्षित रेस्क्यूअर अथवा वन विभाग को सूचना देकर उसे सुरक्षित बचाने में सहयोग करें। प्रत्येक जीव प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए उनका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें