: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ कौशल विकास पर भी रहे ध्यान
Thu, Feb 8, 2024
देश की आर्थिक सेहत सुधरने के कई संकेत मिल रहे हैं। यह संतोष की बात है, लेकिन दूसरी ओर देश के आम आदमी के मन में कुछ दुविधाएं भी लगातार बनी हुई हैं।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ कौशल विकास पर भी रहे ध्यान
गिरीश्वर मिश्र
दिल्ली
पूर्व
कुलपति
,
महात्मा
गांधी
अंतरराष्ट्रीय
हिंदी
विश्वविद्यालय
,
वर्धा
देश
को अगले तीन दशकों के बीच यानी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाते वक्त विकसित देशों में शुमार होने का संकल्प बहुत ही आकर्षक है। इसे लेकर आम जन भी उत्साहित नजर आ रहा है। हालांकि हालात कैसे बदलेंगे और 2047 तक दुनिया क्या रूप लेगी, इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। हो सकता है कि उस मुकाम तक पहुंचते-पहुंचते ‘विकसित’ का अर्थ ही बदल जाए। बहरहाल, हमारे आज के हालात जैसे हैं, उसमें सुधार की बहुत गुंजाइश है। हम जहां हैं, वह स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है।
सभी चाहते हैं कि जो है, उससे बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा, न्याय, कृषि, उद्योग-धंधों की स्थिति हो और हम अच्छे प्रशासन की ओर बढ़ें। इस महत्त्वाकांक्षी कल्पना को मूर्त रूप देने की इच्छा सभी की है। इसके लिए कमोबेश सभी सक्रिय और उद्यत हैं। विश्व की पांचवी अर्थशक्ति के मुकाम पर पहुंचे भारत के आकलन को लेकर अमृतकाल में स्वर्णिम भारत का सपना आकार ले सकता है, बशर्ते हमारी क्षमता, कुशलता और कार्य-संस्कृति में उत्कृष्टता आ सके और बनी रहे।
सच कहें तो जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि सरकार और जनता दोनों के प्रयासों से ही संभव है। इन सबके बीच में गरीबी दूर करने का उद्देश्य सर्वोपरि स्वीकार किया गया है। स्वतंत्र भारत की आज तक की सभी सरकारें इसके लिए काम करती आ रही हैं और विभिन्न उपायों से लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का प्रयास होता रहा है। वित्तमंत्री का यह ताजा बयान कि इस दिशा में काफी प्रगति हुई है और लोगों की आर्थिक दशा सुधरी है, बेहद सुकून देने वाला है।
देश की आर्थिक सेहत सुधरने के कई संकेत मिल रहे हैं और देशी-विदेशी अनेक विशेषज्ञों की भविष्यवाणी इसी तरह की हैं। दूसरी ओर सामाजिक समता , न्याय , सौहार्द और जनहित के लिए किए जा रहे प्रयासों और उपलब्धियों की जमीनी हकीकत से आम आदमी के मन में कुछ दुविधाएं भी बनी हुई हैं। इस दौरान बढ़ती महंगाई , बेरोजगारी, नौकरशाही और न्याय व्यवस्था की मुश्किलों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विकसित भारत की यात्रा में इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। विकसित भारत की कल्पना को आकार देने के लिए भौतिक संसाधन ही काफी नहीं होंगे। इसके लिए प्रशिक्षित और दक्ष मानव-संसाधन की सबसे ज्यादा जरूरत होगी। अब भारत जनसंख्या की दृष्टि से दुनिया में सबसे आगे हो चुका है। यही वजह है कि शिक्षा चाहने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। इस दृष्टि से शिक्षा के लिए प्रावधान को बढ़ाने की जरूरत होगी। आम सहमति के मुताबिक शिक्षा पर बजट में छह प्रतिशत का आवंटन होना चाहिए। इस लक्ष्य तक हम आज तक नहीं पहुंच सके हैं।
प्रस्तावित शिक्षा नीति- 2020 के प्रति वर्तमान सरकार में बड़ा उत्साह है और पिछले कुछ वर्षों में उसका प्रचार-प्रसार भी खूब हुआ है। परंतु उसके प्रावधानों को कार्य रूप में ढालने के लिए जरूरी पहल और पूंजी निवेश नहीं दिख रहा है। पूर्व विद्यालय (प्री स्कूल) से लेकर उच्च शिक्षा के स्तर तक महत्त्वाकांक्षी परिवर्तन का प्रस्ताव सामने आया है। इसमें शिक्षा की संरचना, प्रणाली, माध्यम, शिक्षक-प्रशिक्षण और पाठ्यविषयवस्तु सभी दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण परिवर्तन वांछित है। इसी तरह शिक्षा के अधिकार को मूर्त रूप देने की बात भी हुई है। इन सबके लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन का निवेश अनिवार्य होगा। विकसित भारत के मुख्य सरोकार के रूप में गरीब, महिला, किसान और युवा वर्ग के विकास के लिए सरकार अपनी प्रतिबद्धता जता रही है। इनके लिए गुणवत्ता वाली शिक्षा ही आधार हो सकती है। शिक्षा जगत की जरूरतों पर अवश्य ध्यान दिया जाए।
: मोदी सरकार ने जारी किया श्वेत पत्र, कांग्रेस पहले ही जारी कर चुकी है ब्लैक पेपर
Thu, Feb 8, 2024
रिपोर्ट
राजीव यादव दिल्ली
congress black paper: मोदी सरकार के श्वेत पत्र पर पलटवार करने के लिए कांग्रेस की ओर ब्लैक पेपर लाया गया है। आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ब्लैक पेपर जारी किया है।
लोकसभा में आज एनडीए की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने श्वेत पत्र जारी कर दिया है। इस पर शुक्रवार दोपहर 12 बजे चर्चा होगी। मोदी सरकार की ओर जारी किए गए श्वेत पत्र में यूपीए सरकार के 10 के कार्यकाल और मोदी सरकार के 10 के कार्यकाल की समीक्षा की गई है। इसमें मोदी सरकार ने यूपीए सरकार पर अर्थव्यवस्था को लगभग ध्वस्त करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा इसमें कहा गया है कि यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान राजस्व का मनमाना इस्तेमाल किया है। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने सदन में श्वेत पत्र जारी होने से पहले ही ब्लैक पेपर जारी कर दिया है।
खड़गे ने जारी किया ब्लैक पेपर
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ब्लैक पेपर जारी करते हुए एनडीए सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, सरकार इस बात का जिक्र नहीं करेगी कि कितने लोगों को रोजगार मिला। वे मनरेगा फंड जारी करेगी। सरकार राज्यों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है।
महंगाई को लेकर किया पलटवार
उन्होंने केंद्र की ओर से जवाहर लाल नेहरु और इंदिरा गांधी को लेकर बोले गए हमले पर पलटवार करते हुए कहा कि आज आप सत्ता में हैं, आपने महंगाई को कंट्रोल करने के लिए क्या किया है?
मोदी सरकार के कार्यकाल को कांग्रेस ने बताया अन्याय काल
इसके अलावा कांग्रेस की ओर से जारी 57 पेज के ब्लैक पेपर में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बताई गईं चार जातियां गरीब, महिलाएं, युवा और किसान को रेखांकित किया गया है। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा के 10 साल को अन्याय काल करार दिया है। कांग्रेस ने ब्लैक पेपर में बीते 10 साल में युवाओं, महिलाओं, किसानों, अल्पसंख्यकों और मजदूरों पर हुए अन्याय का जिक्र किया है।
: आरबीआई गवर्नर के बयान के बाद धड़ाम हुआ Paytm का शेयर, नियमों की हो रही थी अनदेखी
Thu, Feb 8, 2024
राहुल राय दिल्ली
paytm payments bank: पेटीएम पेमेंट बैंक से पर आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के बयान के बाद कंपनी के शेयरों में और गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, आरबीआई की ओर से अगले हफ्ते एक FAQ जारी किया जाएगा।
पेटीएम पेमेंट बैंक पर आरबीआई के एक्शन के बाद शेयरों में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास का बयान सामने आया है। आरबीआई गवर्नर के बयान के बाद एक बार भी पेटीएम के शेयर में कमी देखने को मिली है। पेटीएम के शेयर में 10 प्रतिशत की कमी के बाद लोअर सर्किट लग गया है। बता दें कि दिन में 528 रुपये के हाई से स्टॉक 15.40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
यह विशिष्ठ संस्थान से जुड़ा मामला
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि पेटीएम पेमेंट बैंक के खिलाफ ये सुपवाइजरी कार्रवाई है। पूरे सिस्टम के बारे में कोई चिंता नहीं है। यह एक विशिष्ट संस्थान से जुड़ा मुद्दा है।उन्होंने कहा कि यह नियामकीय कमी का मामला नहीं है, बल्कि अनुपालन का मुद्दा है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय बैंक चिंताओं को दूर करने के लिए अगले सप्ताह पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ की गई कार्रवाई से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का एक सेट जारी करेगा।
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जारी करेगी FAQ
उन्होंने आगे कहा कि बीते कई दिनों से हमें पेटीएम से जुड़े मुद्दे पर कई सारे सवाल प्राप्त हुए हैं। हमने उन्हें नोट कर लिया है और उसके आधार पर हम अगले सप्ताह एक FAQ जारी करेंगे।
बीते हफ्ते आरबीआई ने की थी कार्रवाई
बता दें कि बीते सप्ताह आरबीआई ने नियमों को अनदेखी करने का हवाला देते हुए पेटीएम पेमेंट बैंक पर 29 फरवरी के बाद से खातों या पेटीएम वॉलेट में नई राशि जमा करने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से लगातार पेटीएम के शेयरों में गिरावट दर्ज की जा रही है।