बस्तर में स्वास्थ्य : अभियान ने पकड़ी रफ्तार, दूरस्थ अंचलों तक बढ़ा भरोसा
Thu, Apr 23, 2026
10 दिनों में 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, दुर्गम अंचलों तक पहुंचीं टीमें; हजारों मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार
दुर्गम वनांचलों तक पहुंची स्वास्थ्य टीमों ने गंभीर बीमारियों की पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित किया
मोबाइल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए अब कठिन क्षेत्रों में भी मिल रही नियमित चिकित्सा सेवाएं
रायपुर, 23 अप्रैल 2026/
बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है।
अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है।
जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी।
इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है।
राज्यपाल के निर्देश पर : धनेशपुर में दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिविर
Thu, Apr 23, 2026
रायपुर, 23 अप्रैल 2026-
राज्यपाल रमेन डेका ने बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम धनेशपुर में दिव्यांग बच्चों के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। शिविर समाज कल्याण विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से आयोजित कर जरूरतमंद दिव्यांगजनों का उपचार कर आवश्यक उपकरण प्रदान करें।
राज्यपाल ने कहा है कि दोनों विभाग आपसी समन्वय से ग्राम धनेशपुर में विशेष शिविर आयोजित करें, जहां दिव्यांग बच्चों की स्वास्थ्य जांच, आवश्यक परीक्षण तथा उनकी स्थिति का आंकलन किया जाए। साथ ही दिव्यांगता के संभावित कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत सर्वे एवं चिकित्सकीय अध्ययन भी कराया जाए।
निर्देशानुसार समाज कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम गांव पहुंचकर घर-घर सर्वे करेगी तथा पात्र बच्चों और नागरिकों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं दिव्यांग कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित करेगी। शिविर के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को सहायक उपकरणों का वितरण भी किया जाएगा, ताकि उन्हें दैनिक जीवन, शिक्षा और आवागमन में सुविधा मिल सके।
राज्यपाल ने अधिकारियों से कहा कि दिव्यांगता से प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा बच्चों के बेहतर उपचार, पुनर्वास और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।
राज्यपाल रमेन डेका ने ली : रायपुर जिले में विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठक
Thu, Apr 23, 2026
अधिकारी जनता के बीच जाएं और करें संवाद - राज्यपाल श्री रमेन डेका
ग्राम पंचायत स्तर पर जल संरक्षण के लिए डबरी का निर्माण किया जाए
नशे पर सख्ती से रोक लगाए एवं भारी वाहनों के आवागमन पर करे नियंत्रण
रायपुर, 23 अप्रैल 2026-
राज्यपाल रमेन डेका ने रायपुर जिले की विकासखण्ड स्तरीय समीक्षा बैठक ली। राज्यपाल ने कहा कि सभी अधिकारी जनता बीच जाएं और उनसे मिलें। उनके तथा हितग्राहियों से मुलाकात करें एवं उनकी समस्याओं की जानकारी लेकर योजनाओं का फीडबैक लें। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत जानने का सबसे बेहतर तरीका लोगों से लगातार संवाद है। राज्यपाल ने जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट ग्रीन पालना और प्रोजेक्ट रचना की सराहना की।
डेका ने जिले के विभिन्न विकासखण्डों में हो रहे डबरी निर्माण की भी सराहना करते हुए कहा कि हमें बड़े किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, इससे रायपुर के जलस्तर में सुधार आएगा और भविष्य में होने वाले संभावित पेयजल की समस्या का सामना करने में सहयोग मिलेगा। उन्होंने अन्य राज्यों के सफल मॉडलों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को व्यवहारिक और प्रभावी उपाय अपनाने की सलाह दी। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में धान की खेती अधिक होती है, जो पानी की खपत बढ़ाती है, इसलिए बड़े किसानों को अन्य फसलों की ओर भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि रायपुर तेजी से विकसित हो रहा है और आने वाले वर्षों में जल संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाएगा। उन्होंने जल जागरूकता, संसाधनों के संरक्षण और उनके सही उपयोग पर विशेष जोर दिया। साथ ही निर्देश दिए कि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर जल स्रोतों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए, ताकि उसी आधार पर बेहतर योजना और रणनीति बनाई जा सके।
डेका ने कहा कि हमें ग्राम पंचायत स्तर पर छोटी-छोटी डबरी बनानी चाहिए। इस कार्य में समुदाय की भागीदारी अवश्य सुनिश्चित करें और जनप्रतिनिधियों को भी ऐसे कार्यों के लिए शामिल करें। सभी शासकीय कार्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का निर्माण करें और अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित करें। उन्होंने जल जागरूकता, संसाधनों के संरक्षण और उनके सही उपयोग पर विशेष जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि वृक्षारोपण को अधिक से अधिक बढ़ावा दें। एम्स, डॉ. भीमराव अंबेडकर हॉस्पिटल एवं स्कूलों में वृक्षारोपण करें। सड़कों के किनारे भी वृक्षारोपण किया जा सकता है, इससे प्रदूषण की रोकथाम में भी मदद मिलेगी। उन्होंनेे कहा कि विकास की निशानी अधिक से अधिक पेड़ लगाना और हरियाली है।
प्रोजेक्ट हर घर मुनगा की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा दें, नेचुरल फार्मिंग में वैल्यू एडिशन जरूरी है। हमें विशेष रूप से हाइड्रोपोनिक्स को बढ़ावा देना चाहिए। आने वाला समय में इसकी अच्छी संभावना है। उन्होंने नर्सरी हाइड्रोपोनिक्स विकसित करने का सुझाव दिया। “ग्रीन पालना” परियोजना की चर्चा के दौरान राज्यपाल ने जानकारी ली कि नवप्रसूता महिलाओं को दिए गए पौधों की निगरानी कैसे होती है। वे जीवित हैं या नहीं। राज्यपाल ने कहा कि पेड़ लगाना हम सभी की जिम्मेदारी है और हर व्यक्ति को कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए। राज्यपाल ने योग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आम जनता से कहा कि योग की कक्षाओं तक ही सीमित न रहें बल्कि योग सीखने के बाद नियमित रूप से घर में भी इसका अभ्यास करें।
यातायात व्यवस्था पर राज्यपाल ने कहा कि जिले में भारी वाहनों को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। तीव्र गति से ड्राइविंग और हेलमेट के मामले में पहले जागरूकता बढ़ाने और फिर आवश्यक होने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि सख्ती और जागरूकता के जरिए इसे रोकना जरूरी है। इस अवसर पर राज्यपाल की उपसचिव सुश्री निधि साहू, जिले के प्रशासनिक अधिकारियों सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।